दिल

क्या तुझे थोड़ा भी इल्म है
कि तू क्या चाहता है
आज ये मांगता है
कल कुछ और
किसकी तलाश है तुझे
शायद खुद को ही ढूंढ रहा है
खुद को बाँट लिया तूने हज़ारों हिस्सों में
दूसरों में अपने आप को ढूंढ़ता है
बाहर कुछ नहीं है
अंदर हुए हिस्सों को कुछ ऐसा जोड़
कि अंदर और बाहर का फरक ख़तम हो जाये
रह जाए बस तेरे होने का एहसास

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Love – A sacred thread 

कैसा प्रेम है ये
अजीब डोर से बंधा है
न कुछ माँगता है
न कुछ चाहता है
बस देना जानता है
रूह ही रूह से बातें करती है
यहाँ से निकलकर कुछ वहाँ जाता है
और वहाँ से कुछ यहाँ आता है
ये शब्दों का मोहताज नहीं
कोई वादे नहीं मांगता
ख्वाईशो के पुल नहीं बनाता
दबाओ के ज़ंजीरें नहीं पहनाता
पूरी तरह से स्वतन्त्र है
रूह से रूह तक का यह खेल
बस कभी कभी तेरा दीदार मांगता है
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एक पल

ये पल एक उपहार है
कुदरत का एक राज़ है
जी लो इसे पूरी तरह
कब जाने ये निकल जाये
सांसों की डोर से बंधा है
हर तरह का मौसम ये लाता है
आकांक्षाएं उठाता है
कुछ ख्वाहिशें मिटाता है
सुन्दर हैं जीवन की ये लहरें
कुदरत का एक राज़ है
ये पल एक उपहार है

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Divine Love

रूह से दिल तक
निशब्द से शब्द तक
सन्नाटे में नाचती हुई
अपने में इतनी भरी हुई
कि किसी से कुछ मांगती नहीं
बस देना जानती है

जो इतनी व्यापक है
कि शरीर में समां नहीं सकती
अपने में पूरी कायनात को समेट लेती है
जिसकी शुरुवात और अंत नहीं
किसी से ऐसे मुहब्बत हुई
तो समझ लो परवरदिगार से तुम्हारी रूह जुड़ गई

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ज़िन्दगी की धारा

क्या बुरे बिना अच्छा होता है
क्या मृत्यु बिना जन्म होता है
क्या रात बिना दिन होता है

फिर क्यों ना हम अचे और बुरे के पार जाएँ
जहाँ ज़िन्दगी की नदी सब विपरीतताओं को अपने में समाते हुए
खुबसुरती से बह रही है
क्यों ना हम इसके पानी में भीग कर
इस शाश्वत पल को रंगों से भर दें
क्यों ना हम ज़िन्दगी की धड़कन को
बेशर्त महसूस करें

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गुज़ारिश

कभी कभी पूरी ज़िन्दगी ही सवाल लगती है
अपने आगोश में जाने कितने राज़ लिए
अब राज़ों के बंद दरवाज़े खोलने की ताकत मुझ में नहीं
तुझ से गुज़ारिश है एक ऐसा हवा का झोका भेज
कि दरवाज़े अपने आप खुल जाएँ
और फिर ऐसी मशाल जला
कि बंद कमरों में उजाला आ जाये
फिर ऎसे दिल झूम उठे
जैसे हवा के रुख में पत्ता झूमता है
अब सब तुझको दिया
कोई ताला नहीं न कोई चाबी
अब घुल जाने दे मुझे अपने आप में
बह जाने दे अपने साथ
कि फिर फासला न रह जाये
फासला तो कभी था भी नहीं
लेकिन फिर भी ये दूरियां मिटा दे

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कुबूल है

अपनी परछाई से डर नहीं लगता
ख़ामोशी से डर नहीं लगता
कुछ ना करने से दर नहीं लगता
अपने होने से डर नहीं लगता
खुद को मैंने कुबूल किया

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शांति का दरिया

क्या शोर में ख़ामोशी है
या ख़ामोशी में शोर
क्या चार दीवारों के बीच में खालीपन होता है
या खालीपन में चार दीवारें
बस देखने का नज़रिया है
नज़रिया बदल दो तो ज़िन्दगी बदल जाती है

क्या विचारों के बीच में ठहराव है
या ठहराव के बीच में विचार
बस एक गहरी शांति का असीम दरिया है
जिसमें सब उभरता है
और फिर विलीन हो जाता है

इस शांति को नापा नहीं जा सकता
बस इससे जुड़ा जा सकता है
फिर ज़िन्दगी सागर में उठती हुई लहरों की तरह दिखती है
सतह पर शोरगुल है
पर अंतरतम में प्रगाढ़ शांति

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तलाश

कहते हैं ज़िन्दगी में वही मिलता है जो हम चाहते हैं
पर क्या हमें पता है हमें क्या चाहिए
अक्सर दिल के कोने से दो आवाज़ें आती हैं
एक को चाहिए ज़िन्दगी की रफ़्तार
और दूसरे मांगती है ठहराव

ज़िन्दगी के इस मोड़ पर दूसरी आवाज़ ज़ादा सुनायी पड़ती है
दिल को चाहिए एक छोटी सुकून की ज़िन्दगी
जहाँ एक सादगी हो
कुछ अपने हों दिल के करीब
दिखावे का छल न हो
आगे बढ़ने का पागलपन न हो

कामयाबी के अँधेरे की जगह
सादगी की रोशनी हो
लोग कहते हैं मैं गलत वक़त में पैदा हो गया
शायद ठीक ही कहते होंगे
जिसे मैं ढूंढ रहा हूँ वो शायद वक़्त की गहराई में दब गया है
कितना भी खोदो बस यादों के बिखरे तिनके के सिवा कुछ नहीं मिलता
अब शायद वक़्त के पार ही जाना पड़ेगा
रोशनी के तलाश में

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खुदा

ढूंढा तुझे हर जगह
पर तू तो हमेशा साथ ही था
हर सांस में
मेरी रूह में
इस प्रकृति में
हर इंसान में
हर इमारत में
हर नदी में
हर पहाड़ में

क्या है ऐसा जिसे तुन्हें रौशन नहीं किया
अच्छे और बुरे के पार है तू
हमारे वजूद का एहसास है तू
ज़िन्दगी के लम्हों का सार है तू

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